गुरुवार, 18 अप्रैल 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ११४ -– सच्ची मुहब्बत करने वाले

अभिव्यक्ति क्रमांक ११४ -– सच्ची मुहब्बत करने वाले

सच्ची मुहब्बत करने वाले नही किसी बात पर रूठ जाते हैँ
सहारा बनते वो प्यार का कभी नही इस तरह अकड जाते हैँ
होता नही यहाँ कभी भाव अंह का नही धुआं होता वहम का
न परवाह लोग क्या कहेंगें ये मुहब्बत करते व करते रहेंगें
न यह इक दूजे से रूठते नही कभी यह इक –दूजे को लूटते
दिलोदिमाग कवि बनता बने निशां दर्दनिवारक मरहम का
गर जीने का आनन्द लेना चाहो मुहब्बत जरूर करना यहाँ
नही दलदल पावोगे तो गावोगे मोहक जमीं मोहक आसमां
पथिक अनजाना

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