दुनिया में विशाल
जनसागर मौजूद राहों पर
निर्णय तुम्हारा
हर सांस क्या यू ही सरकना
या फिर कर साहस
तोडो क्रम व निकल चलो
न बदली राह, थे
जहाँ तुम वहाँ कोई और हैं
तूफान आये पतझड
छाये कभी हरियाली गाये
राहे बेअसर
पंक्तियाँ भी बेअसर न बदले साये
याद उसी को किया
जाता जो पंक्ति ठुकराता
मंजिल पाता जो
मंजिल से बेपरवाह हो जाता
पूछोगे गर मंजिल
कहें रहनुमां अनुसरण करो
न बतायें आकार न
करें विचार मंजिल का हैं
जीवन व्यर्थ हो
जाता जीवन नही दिल का हैं
कहते हैं मंजिलें
तो ख्वाबों का प्रतिबिम्ब होती
जीवन राही हो पथिक
न मायामोह से रूकते हैं
राही भीड में
अनगिनत, याद कोई किया जाता
विचारो चाहे पूछे
न तुम्हें कोई जीवन राह में हैं
संख्या
अनुसरणकर्ता की बढायेगे राहखो जायेंगें
यह हमसफर व ज्ञानी
सब तुम्हें यहाँ बहकायेंगें
निकल चलो अलग राह
पर तब खुदा को पायेंगें
पथिक अनजाना (
सतनाम सिंह साहनी )
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