रविवार, 17 मार्च 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ०८१ - मेंने तो जो मिला उसको -- पथिक अनजाना

मैंने तो जो मिला उसको ही तहेदिल से प्यार दिया
लडकर अपनों से यारों की जिन्दगी को संवार दिया
स्वार्थ को मान खुदा यारों नेप्यार सेवा को ठुकराया
दौलत वाले जिन्हें मिला यार, कुछ ने भाग्य गवांया
दोष दे हालातों को, न सोचा यह वक्त क्यों हैं आया
भले अनजाने पथिक बाँटे प्यार ने जीना सिखा दिया
मिले न हमें प्यार गम नही,चालें जहाँ वहाँ हम नही
मांगते सबकी खैर, चूंकि नही हमें यहाँ किसी से बैर

पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)

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