Friday, March 1, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक – ०६८ -- सुना हैँ साकी तेरे चाहने वालों -- पथिक अनजाना

सुना हैँ साकी तेरे चाहने वालों
में इक नाम मेरा भी मौजूद हैँ
करीब आ साकी मेरे अब यह
तो बता अपने इस नामुराद को
उस फेहरिस्त की आला पंक्ति
में क्यों रखा हैं इस बरबाद को

पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)

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