Thursday, February 28, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक – ०६७ - कितने खुदा --- पथिक अनजाना

हर इंसान की शक्ल के पीछे कितने ही खुदा होते हैँ
कुछ खुदा नाखुदा कुछ नाखुदा भी इनके खुदा होतेहैं
ये खुदा अपनी बनाई हुई दुनिया के नाखुदा होते हैँ
खुदा ने बख्शी इक शक्ल पर इंसा कितने जुदा होते
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)

यदि उदगार को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें

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