मंगलवार, 9 अप्रैल 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक १०५ -– राह नई घटना को

लहरें सागर मे उठती गिरती जा साहिल से टकराने तक
आती जाती ये सांसै जीवन के हर पल को बदल जाती है
घटनायै गुम अतीत में होती राह नई घटना को बताती हैं
लहरें अगली सांसों को भविष्य के कुछ अनबूझे प्रश्न देती

पथिक अनजाना

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