मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ०९७ - बुजुर्गों ने सीख दी थी --- पथिकअनजाना

बुजुर्गों ने सीख दी भावी पीढियों को नेकी कर कुऐं में डाल
वर्तमान पीढियों ने निभाई नेकी ले कर्ता को कुऐं में डाल
पर वैचारिक स्तर व जीवन शैली में परिवर्तन हो गया है
नजरें कही न झुकें यह भी हमारे ही पूर्वजों ने सिखाया हें
क्यों कहानी को जीवनदान देकर ताउम्र भयभीत रहा जावे
या इंसा कहानी खुद लिखे स्वघोषित बुद्धिमानयहाँ कहलावे
माना नेकी अन्तत: यादों में कर्ता को सम्मान दिलाती हैं
अंह सवार हो तब छणिक मान भविष्य मानहीन हो जाता
गुलाम किसके आप चाटुकारों के या बसे दिलों मे यारों के
पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)


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