खबर तो यहाँ सदा से कब्र होती जो घटी
कही अतीत मे हैं
समाचारपत्रों पाठकों को जाग+रूक
नागरिक माना जाता हैं
जागरूक उन्हें माना जाना चाहिये जो
निस्वार्थ राह बताते
फैसला आप गर सुशिक्षित,जागरूक तो
निस्वार्थ यहाँ करे
जो रचियता ने यहाँ लिखा उससे कितने
सहमत कहलाते
या मानें कि समाचारपत्र होता सदैव ही
अतीत - दर्पण हैं
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)
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