दौलत चाहे अर्जित बेइमानी से की गई या कमाई से
दौलत
चाहे इकठ्ठी ऋणों से हो या करीबी यारों से
झूठी शान
की खातिर दौलत जायदाद बना जातेहो
न मिले शीतल
सुखमयी छांव भटकते रह जाते हो
पानी
शीतलता हो ठीकरे,वैभव झूठे मान बिसार दो
तुम
आत्मा को न तडफाओ यात्रा उसकी संवार दो
पथिकअनजाना
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