Wednesday, March 6, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक १०३ -- मर्यादाओ को तो --- -- पथिकअनजाना

मर्यादाओं को तो जमाना मरी यादें जगत कहने लगा
वादों को तो इंसान अब वक्तीयाँ कहानियाँ कहने लगा
न तो सामाजिक रहनुमाओं न मुल्क में बची मर्यादा हैँ
दफन वादों की छाती पर मर्यादाओं की होली जलती हैँ

पथिक अनजाना

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