Saturday, March 30, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ०९४ - प्रार्थना में चापलूसी --- पथिक अनजाना

प्रार्थना में चापलूसी भिखमंगापन होता हैं
अहं समावेश व इंसा को स्वार्थी बनाता हैं
यथाशक्ति निस्वार्थ सुकर्म करो मेरे यार
उसे न गिनना न याद करना किसी क्षण
निठ्ठला न बने अशांति सुचालक न बनना
भिखारी नही बनना हो मेरी बात याद रखे
कर सुकर्म आप सदा सृष्टिको आबाद रखे
पथिकअनजाना (सतनाम सिंह साहनी)


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