रहम कर दो मुझ पर मेरे मेहरबान खुदा
न ले जा बुलन्दी
तक मेरा नन्हाँ आशियाँ
गर यारों ने सबूत
बेवफाई का दिया कभी
बत्तर जिन्दगी व
मौत का होगा वोह समां
बसने न आये जमीन
पर बसते दिलों मैं हैं
रोने की चाह नही
रोता देखना नही चाहतेहैं
मुस्कराये हर राही
दरखास खुदा से मांगतेहैं
पथिक अनजाना(सतनाम
सिंह साहनी)
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