सोमवार, 25 मार्च 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ०८९ -- मोबाईल या कबूतर -- पथिक अनजाना

बेमुरव्वत खुदा ने यह क्या तूफान बनाया
सदी २१वीं में मोबाईल या कबूतर सजाया
चर्चित सदी के कबूतर राहे पैगाम हैंआया
कहे पैगाम उनका न आया, आंखें रो पडी
क्षणिक दिल तडफा मैंने जवाब भिजवाया
मजबूरी न समझे बात हठ पर  जा अडी
दिल उनका न रोया परन्तु आंखें  रो पडी
मुहब्बत की खुमारी जो उन पर  जा चडी
कभी आसमां,राहें देखे मेरी आंखे घडी घडी
अंबार हैं शिकवों के विचार हालों के नहीहैं
गर विचार करते वे, तो नैन उनके न रोते
पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)


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