Friday, March 22, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ०८६ - न रख आस ----- पथिकअनजाना

न रख आस न विश्वास तू कभी कैसे भी
अपनी जन्मी औलाद पर तुम कभी यहाँ
न रखो इनके प्यार किसी बात में यकीन
फूटे सिर दीवार से,गवांयेंगें जीवन हसीन
जीवन सब व्यर्थ गंवा रहे खोजे राह कहाँ
जीवन नही यह जो तुमने मान लिया हैं
संस्कार दो धन नही तुम तन व मन नही
बात न मानी मेरी, टूटेगा मोह बंधन नही

पथिकअनजाना( सतनाम सिंह साहनी)

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