Monday, March 11, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक – ०७५ - लो जल्वा रहमतों का - पथिक अनजाना

परवरदिगार हर घडी रखे अपनी नजर में निहालों को
बरसाता हैं सदा रहमते कर हल छोटे बडे सवालों को
यह तो इंसान के अपने किये फैसले व कर्म हैँ यारों
मोह,लोभ से सुख नही इंसा दुखों को चुन लेता प्यारों
चेताये ज्ञानी सदा, न सोचे वंशजों को क्या दे रहा हैं
शिकायतें,गुजारिशें कर इंसा खुदा से,राह को छोडता हैं
लो जल्वा रहमतों का सूची सवालों की क्यों जोडता हैं

पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)

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