परवरदिगार हर घडी रखे अपनी नजर में निहालों को
बरसाता हैं सदा रहमते कर हल छोटे बडे सवालों को
यह तो इंसान के अपने किये फैसले व कर्म हैँ यारों
मोह,लोभ से सुख नही इंसा दुखों को चुन लेता प्यारों
चेताये ज्ञानी सदा, न सोचे वंशजों को क्या दे रहा हैं
शिकायतें,गुजारिशें कर इंसा खुदा से,राह को छोडता हैं
लो जल्वा रहमतों का सूची सवालों की क्यों जोडता हैं
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)
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