Sunday, March 10, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ०७४ - ईजाद किया खुदा ने - पथिक अनजाना

ईजाद किया था खुदा ने अक्ल दी इंसा को खुदा ने
येकृति मेरी रचना पृथ्वी व वाशिन्दों की रक्षा करेगी
हैरां खुदा सारी रचनाओं की बात क्या अपने न छूटे
नजर जिधर इंसान की हर कृतियों की लाशें भी लूटे
भेजे शांतिदूत पर जिन्होंने यहाँ की हर जंग हारी हैं
गवाह इतिहास हर युग में प्रयास इंसा के रहे जारीहैं
बना गुलाम सारी कयानात को कहे खुदा तेरी बारी हैं

पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)

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