Monday, February 4, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ०४३ -- कितने खुशनसीब — पथिकअनजाना

जिन्हें आराम से नींद आ जाती हैँ
कितने खुशनसीब होते हैँ वो लोग
जिनकी आँखें सैर जहाँ की कराती
दोनों में फर्क यही कि इक जागता
सपनों में दूजा जाग सपने देखताहैँ
कुछ देखे यार ऐसे भी मैंने जहाँ में
जो दिखते जागते पर सोये होते हैं
जो दिखते सोये पर जागते होते हैं
कुछजहाँ पर नजरें बन गवाह रखते
कुछ नजरों से जहाँ को इच्छानुसार
देखते समझते मान विचार रखते हैं
दायरा विचारे तोजन्म सुवास होता हैं
नजारों के परे भी कुछ खास होता हैं
पथिक अनजाना

ब्लाग --  विचार सागर मंथन

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