शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक – ०४८ - चाबी किस खजाने की यार — पथिकअनजाना

खोजता है न जाने चाबी किस खजाने की यार तू
खजाना तभी जब दिमाग में कोई ज्ञान विज्ञान हैँ
ज्ञान तो वह ही पूर्ण माना जाता खुद अजमायाहो
पाये हुये खजाने को अजमा तभी जा ज्ञान पायेगा
पथिकअनजाना

ब्लाग --  विचार सागर मंथन

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