नही जुर्रत हैं
खिलाफत की
हमारी फेहरिस्त गुनाहों से
रूबरू होने की है
तैयारियाँ
पर कर दे खुद इक मेहर
दूर रहू गुनाहों
से बाद मैं
सदैव गुनाहों से
हर जन्म
सजा पिछले
मेरेगुनाहों की
भुगतने के हिम्मत
भर दे
ब्लाग – विचार
सागर मंथन
ब्लाग -- विचार सागर मंथन
पथिक अनजाना
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