गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक – ०६० --- अंधियारा छटने लगा — पथिकअनजाना

अंधियारा छटने लगा पौ फूटने लगी
दुनियायी बेडियाँ हमारी तोटूटने लगी
हो निराश दुनिया व रंगीन नजारों से
हुये मशगूल दूर के अनदेखे नजारों में
प्रभाव अभी बताता दुनिया में आये हैं
दुनियायी प्रभाव के रंग दबते चले गये
विचारों की दुनिया के रंगों में रम गये
रोज खिडकी खोलता ब्लाग दुनिया से
नजारे बाहर व भीतर , हम थम गये
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)
यदि उदगार को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें
RESPONSE ON – 21thcent.vichar@gmail.com



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