Tuesday, February 19, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक– ०५८-- अमृत प्याले पी देव ----- पथिक अनजाना

अमृतप्याले पी देव क्यों शक्तिशाली हावी न हो सके
क्या दानव देवछाया पा जमीं पर आ अमर हो गये हैं
रूद्राक्षधारण अमृतपान ध्यान ज्ञान व योग इंसान हेतू
क्यों सारे प्रयास पूर्णत: दानवीय विचार न हटा सके ?
इंसा को जमीं पर राह दिखाने दानवता जीवित रखी हैं
ग्रन्थ,कथायें दे तुझे चुनाव फैसले की बागडोर दे रखी हैं
अविवेकी फैसलों से खाईयाँ खुद इंसान ने खोद रखी हैं
महाशक्ति व ज्ञानी मेरे खुदा का खोया कहाँ चिमटा हैं
शैतान व देवध्वज जमीन पर, जा खुदा कहाँ सिमटा हैं?
----पथिक अनजाना    
यदि उदगार को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें


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