Thursday, January 31, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक -०३९-- जंग पैदाइश में रिहायश में मौजूद - पथिक अनजाना

जंग पैदाइश में रिहायश में है मौजूद
जंग जीने व फर्माइश व ख्वाहिश में
नही घूमा दिल से न गुजारी जिन्दगी
बेमुरव्वत ठोकरें कैसे करें हम बन्दगी
गैरों से नही रहा भय हमें यहाँ कभी
अपने बने गैर व गैर बने सदा अपने
हंसता पथिक अनजाना कहे किसे गैर
पसंद, राह अपनी फिर होता क्यों बैर
ब्लाग – विचार सागर मंथन
सतनाम सिंह साहनी
पथिक अनजाना

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