सोमवार, 28 जनवरी 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक -- ०३६ -- - शर्मसार चेहरा हमारा --- सतनाम सिंह साहनी

शिकायत क्या करें तुमसे उस रहनुमाँ की
बदनाम उसी ने हमें यहाँ पर कर दिया हैं
हिफाजत कैसे करें अपनी आबरू की हम
शर्मसार चेहरा हमारा उसी ने मढ दिया हैं
ब्लाग --  विचार सागर मंथन

पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी )

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