Thursday, January 24, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक -- ०३२ - गर आप पहले से बहरे हैं --- सतनाम सिंह साहनी

विश्वास नहीं क्यों आपको खुद पर सो मांगते तुम  खुदा से हो
ऐसे जीवन ,मान-ज्ञान की क्या कीमत जिसमें शंका खुद पर हो
करके विश्वास क्यों साबित हो गया  आपने यहाँ गलत बोया हैँ
वही लहलहाती फसल सामने अतीत में जो आपने कभी बोया हैं
अब पछताने से क्या हो सकेगा आपने अवसर यहाँ तो खोया हैं
झुकी क्यों गर्दन प्रकट हुआ वोसत्य सामने क्या आपने बोया हैं
तब आप हंसते थे सोचिये अब आपकी हंसी को क्या हो गया हैं
गर आप पहले से बहरे  तो क्यों शिकायत कि वे बहरे हो गये हैं
---  मित्र सोचिये क्या आपने कभी अतीत में आत्मिक
आवाज नही सुनी थी ?
 गर हाँ तो ---------
ब्लाग --  विचार सागर मंथन
पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी )

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