Sunday, January 20, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ०२८-- -यारों मुझे भी सिखा दो तुम निर्णय -- सतनाम सिंह साहनी

यारों मुझे भी सिखा दो तुम निर्णय
किस कसौटी पर रख किया करते हो
पक्षहित या कालाधार पर विचार या
स्वहित पक्षहित पर तवज्जों देते हो
मेरा जमीर यह नहीं स्वीकार करता हैं
जनहित से न जुडे कालाधार निर्णय
तब  न्यायहित ? ही शेष रह जाते हैं
दिलोदिमाग अधिकतर झुकता मेरा
मेरा न्यायहित को छू लेने को सदैव
साथ विश्वास जाते न्यायाधीश के पास
करते शिकायत पुलिस की असहाय हो
मुस्कराते हुये सब स्वहित जब साधते
और हम बेवकूफ बुरे यहाँ बन जाते हैं
समानाधिकार की छत तले वहाँ पर
होता सौदा तब शह चोर पा जाते हैं
हम जमाने की नवीन परिभाषा क्षेत्र
में निर्णय क्यों नही किया करते हैं 
ब्लाग  ---  विचार सागर मंथन
सतनाम सिंह साहनी
पथिक अनजाना  

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