Friday, January 18, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक -- ०२६ -- यारों कोई कीमत नही रही --- पथिकअनजाना

यारों कोई कीमत नही रही हमारी जहान में
न हम मौजूद किन्ही यारों के ख्यालों में हैं
भटक रही हैँ जिन्दगी न समझे कहाँ हैं हम
तैरती बेमकसद जिन्दगी खो गई सवालों में
सवाल,बवाल हमारे राह दिखाने वाले न कोई
हर घडी गुजरी रही हर पल हमारी सांस सोई
राह गुजरे ऐसे मानो मेरी तलाश पूरी न होई
कहने को नही कुछ न राह किनारे लुभा सके
अनुभव, एहसास हम न किसी को बता सके
ब्लाग  --  विचार  सागर मंथन
सतनाम सिंह साहनी
पथिकअनजाना

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