यारों कोई
कीमत नही रही हमारी जहान में
न हम मौजूद किन्ही यारों के ख्यालों
में हैं
भटक रही हैँ जिन्दगी न समझे कहाँ हैं
हम
तैरती बेमकसद जिन्दगी खो गई सवालों
में
सवाल,बवाल हमारे राह दिखाने वाले न
कोई
हर घडी गुजरी रही हर पल हमारी सांस
सोई
राह गुजरे ऐसे मानो मेरी तलाश पूरी न
होई
कहने को नही कुछ न राह किनारे लुभा
सके
अनुभव, एहसास हम न किसी को बता सके
ब्लाग -- विचार
सागर मंथन
सतनाम सिंह साहनी
पथिकअनजाना
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