Wednesday, January 16, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक -- ०२४---- यकीन व यार --- सतनाम सिंह साहनी (पथिकअनजाना )


यकीन करो गर चेहरों पर दुश्मनों के
उनके दिली धडकनें दोस्ती की होती है
हैँ क्या यकीं तुम्हें जमाने में दोस्तों पर
अंह केमनके दुश्मनी के धागे में होते है
ब्लाग --  विचार सागर मंथन

सतनाम सिंह साहनी (पथिकअनजाना)

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