रविवार, 13 जनवरी 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक -- ०२१ --- धुआँ जब उठ रहा हैँ ----सतनाम सिंह साहनी (पथिकअनजाना)



कहीं तो विचारों में असमानता बरकरार हैँ
कहीं गहराईयों में आग जल रही हैँ प्यारों
बुझा दो आग को प्यार से यही औजार हैँ
अस्त्र यहाँ प्यार भरे जीवन का मूलमंत्र हैँ
प्यार ही शस्त्र यही सुखद सांसों का तंत्र हैँ
प्यार न होगा तो इंसा खुद राख हो जावेगा
दुआ हैँ जो दरबारे खुदा की बख्शी बहार हैँ
प्यार से हर पर्वत खाई मिटने को तैयार हैँ
आँखों बातों से प्यार ही  सफल व्यापार हैँ
पुकारो प्यारसे ये कान सुनने को बेकरार हैँ
ब्लाग --  विचार सागर मंथन

सतनाम सिंह साहनी (पथिकअनजाना)

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