नसीबों वाले हैँ जो बिस्तरों पर आते ही सो जाते हैँ
दौलत वाले जागते ही दौलत के नशे में खो जाते हैँ
हम न तो नसीब वाले ही साबित हुये इस जहान में
न नसीब न दौलत नशा मिला कैसे जागतेव सोते
है
दिन लेप-टाप पर गुजरता रात्रि गगन निहारा करते हैं
ब्लाग -- विचार सागर मंथन
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सतनाम सिंह साहनी (पथिकअनजाना )
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