यह दोजख, दो मुख हैँ दुनिया अनेकों चेहरे लिये
क्यों पालते भोगते हैं ऐसे जाने विचार किस लिये
खुदा ने बाँटी ढेरों नियामतें बनाया जमीं को स्वर्ग
इंसान ने बाँटकर
फसाद बनाया जमीं को नर्क हैँ
ब्लाग - विचार सागर मंथन
सतनाम सिंह साहनी
(पथिकअनजाना)
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