Thursday, January 10, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक -- ०१८ ---- मान लीजिये - सतनाम सिंह साहनी (पथिकअनजाना)



हर गुजरते क्षण के साथ हर शै में यहां हो जाता परिवर्तन हैं
उत्तरोंतर जुडती घटती घटनायें जाहिर करती रहती परिवर्तन
नजरों की सीमा से बाहर आता नजर कहलाता वह परिवर्तन
जीवनमृत्यु में बंधी सीमायें ब्रम्हाण्डौं में करती सदा परिवर्तन
परिस्थितिवश इंसानी विचार व्यवहार भी दर्शातेरहते परिवर्तन
जरूरत क्या हमें किसी राह की क्यों सपनों में समय खोते है
मान नियंत्रण अनबूझी प्रकृति फैसला रे इंसा जो कुछ जुदा है
न जरूरत खुशामद खुदा की मान सुकर्मों जो खुदा के खुदा हैं
ब्लाग -  विचार सागर मंथन
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सतनाम सिंह साहनी (पथिकअनजाना)

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