Sunday, January 6, 2013

अभिव्यक्ति क्रमांक ०१४ --- -सत्य हैं युग सदैव ---पथिक अनजाना



सत्य हैं युग सदैव परिवर्तनीय हैं बहता जो पानी अभी था यहाँ
वह मौजूद अगले पल वहाँ न होगा जो आज  वह कल न होगा
मानवीय हृदय आवाश्यकतायें  इच्छायें चरित्र  चंचल रहता हैं
प्रकटतः वही हवा पानी इंसा बदली परिस्थितियों में बदलता हैं
हरेक अपने अस्तित्व ,अहं की रक्षार्थ युद्धों का सामना करता हैं
समूची सृष्टि व इंसानी दिलोदिमाग में जारी युद्ध जारी रहता है
सतनाम  सिंह साहनी
ब्लाग --  विचार सागर मंथन

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