Monday, December 31, 2012

अभिव्यक्ति क्रमांक ००८ ---मंजिल पा जाने का आन्नद- पथिक अनजाना 31/12

मंजिल पा जाने का आन्नद
स्मरणीय व लघुजीवी होता हैं
मंजिल पाने हेतू किये सफर
के अनुभव स्थायी दीर्घजीवी हैं
ऐच्छिक वस्तु या जीव शीघ्र
समर्पित हो जावे मूल्यहीन हैं
तमन्ना जागे लक्ष्य हेतू भागे
व सफलता मिले मूल्यवान हैं 
पथिक अनजाना
ब्लाग --  विचार सागर मंथन 


No comments:

Post a Comment

on comment page