Wednesday, December 26, 2012

अभिव्यक्ति क्रमांक ०० ३ -- -अनजानी तलाशें---पथिक अनजाना--

चाहतों और आहटों के दो तटों के बीच में रहकर
इंसान लिखी खुदाई किस्मती लहरों से खेलता हैं
आहटों व बाहटों के अनजाने संघर्षों के बीच में हो
इंसा असंभावित अनजानी तलाशें किनारे खोजता
ब्लाग --  विचार सागर मंथन

-    सतनाम सिंह साहनी     (पथिक  अनजाना ) 

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