हवाओं में बून्दों
में जर्रे जर्रे में सुना खुदा हैँ
मानी दिल ने
मौजूदगी जरूर हैँ पर न देखा
बहुत खोजा न पा
सका अब तक मैँ तुझको
पूछी राह
ज्ञानियों से जाना मौजूदगी मशहूर
न देखा ज्ञानियों
ने न रूपआकार मैंने जाना
कहते सब पूर्वज
मानते आये तुम भी मानो
ज्यादा पूछो कहे
एहसास करो विश्वास करो
कहानी तरह सबने
विभिन्न चित्रण पेशकिये
भ्रामक फैसला न कर
यार खोजनआराधने का
निर्णय बीजारोपण
सुकर्मों व प्रसारित मुस्कानें
खुदा कोऐसे पायेंगें
कहलायेंगें पथिक अनजाने
पथिक अनजाना (
सतनाम सिंह साहनी)
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