पूछा किसी ने क्या अपनों को लोकलाज के कारण निभाते हो
क्या सपनों में परेशानियों भरे विचारों को भूलने हेतू जोडते
हो
दूजा सवाल क्या ये
सपने व अपने यथार्थ में हितैषी होते हैं
दोंनों ही रंगीन
मोहक आडंबरपूर्ण व भीतरी भयावह होते हैं
इस मायाजाल के बिना इंसान स्वंय को क्यों अधूरा मानते हैं
नही मानते तो क्यों सपनों अपनों के मध्य जीवन गुजारते हो
पथिक अनजाना
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